
कभी कभी बच्चा कमरे में बैठा होता है, लेकिन उसका मन कहीं और दौड़ रहा होता है। पैर अपने आप हिलते हैं, उंगलियाँ रंग ढूंढती हैं और मुँह से हल्की सी इंजन की आवाज़ निकल आती है। ऐसे ही पल में Max-D बिल्कुल सही लगता है। यह ऐसा ट्रक नहीं है जो चुपचाप खड़ा रहे। कागज़ पर बना होने के बाद भी इसमें रफ्तार झलकती है, जैसे अभी कूद पड़ेगा और कहानी शुरू हो जाएगी।
Max-D को देखते ही बच्चे समझ जाते हैं कि यह कोई साधारण गाड़ी नहीं है। इसका अंदाज़ अलग है। थोड़ा गुस्सैल, थोड़ा शरारती और पूरी तरह निडर। इसकी शक्ल देखकर दिमाग में अपने आप तस्वीरें बनने लगती हैं। बड़ा मैदान, चारों तरफ शोर, मिट्टी उड़ती हुई और बीच में Max-D, जो सबका ध्यान खींच लेता है। बिना कुछ बताए, यह ट्रक बच्चे को अपने खेल में खींच लेता है।
जैसे ही पेज को प्रिंट किया जाता है, वह साधारण कागज़ नहीं रहता। वह एक खुला मैदान बन जाता है। कुछ बच्चे बिना सोचे तुरंत रंग उठाते हैं और रंग भरना शुरू कर देते हैं। उन्हें बस वही करना होता है जो मन कहे। कुछ बच्चे पहले थोड़ी देर देखते हैं, सोचते हैं कि आज Max-D कैसा दिखेगा। ज्यादा डार्क, ज्यादा चमकदार या कुछ बिल्कुल अलग। यही सोच इस पूरे मज़े की शुरुआत होती है।
जब बच्चा रंग भरता और पेंट करता है, तो समय का एहसास कम हो जाता है। हर रंग के साथ Max-D थोड़ा और ज़िंदा लगता है। पहिए भारी दिखने लगते हैं, बॉडी में ताकत नज़र आती है। अगर रंग लाइन से बाहर चला जाए, तो वह गलती नहीं लगती। वह तो तेज़ रफ्तार का असर बन जाती है। अगर कोई हिस्सा अलग दिखे, तो वह किसी ज़ोरदार छलांग की निशानी बन जाता है।
कई बच्चे इस दौरान बोलते रहते हैं। वे खुद ही कहानी सुनाते हैं। बताते हैं कि Max-D ने कैसे सबको पीछे छोड़ दिया, कैसे उसने बड़ा सा जंप लिया और फिर भी सीधे खड़ा उतर गया। कभी कभी पूरा कमरा शांत हो जाता है। यह वह शांति होती है जब बच्चा पूरी तरह डूबा होता है। न कोई डिस्टर्बेंस, न कोई जल्दी। बस रंग, कागज़ और कल्पना।
Max-D का रिश्ता Monster Jam की दुनिया से अपने आप जुड़ जाता है। बच्चे को नियम जानने की ज़रूरत नहीं होती। उसे बस एहसास चाहिए। बड़ी गाड़ियाँ, ज़ोरदार आवाज़ें, रोमांच और मज़ा। उसके मन में Max-D मैदान में उतरता है, घूमता है, उछलता है और सबको हैरान कर देता है। यह सब कुछ तब होता है जब बच्चा आराम से बैठा ड्रॉ करता रहता है।
इस गतिविधि की सबसे अच्छी बात है आज़ादी। यहाँ कोई सही या गलत नहीं होता। हर Max-D अलग हो सकता है। कोई गहरा रंग इसे और ताकतवर बना देता है। कोई चमकदार रंग इसे खास बना देता है। बच्चा जो चाहे वही करता है। यही आज़ादी उसे आत्मविश्वास देती है। वह बिना डर के नया ट्राय करता है, बदलता है और आगे बढ़ता है।
धीरे धीरे यह सिर्फ़ टाइम पास नहीं रहता। जब बच्चा बार बार रंग भरता, पेंट करता और ड्रॉ करता है, तो वह फैसले लेना सीखता है। वह समझता है कि उसकी पसंद मायने रखती है। आज Max-D थोड़ा गंभीर लग सकता है। कल वही ट्रक मज़ेदार और चंचल लग सकता है। एक ही तस्वीर हर बार नई कहानी बना देती है। इसी वजह से बच्चे बार बार कहते हैं, एक और पेज प्रिंट कर दो।
अगर भाई बहन या दोस्त साथ बैठ जाएँ, तो माहौल और मज़ेदार हो जाता है। हर किसी का अपना Max-D होता है। तुलना शुरू होती है, लेकिन हँसी के साथ। मेरा वाला ज़्यादा तेज़ है। तेरा वाला ज़्यादा ताकतवर है। बड़े लोग बस सुनते हैं, थोड़ा सा प्रोत्साहन देते हैं और बच्चे खुश हो जाते हैं।
जब काम पूरा हो जाता है, तो वह पेज कहीं गायब नहीं होता। अक्सर दीवार पर लग जाता है, फ्रिज पर चिपक जाता है या ड्रॉइंग फोल्डर में रखा जाता है। हर बार जब बच्चा उसे देखता है, उसे याद आता है कि उसने खुद कुछ बनाया है। यह एहसास बहुत खास होता है और बच्चे को अपने ऊपर भरोसा करना सिखाता है।
Max-D को रंगना पढ़ाई जैसा नहीं लगता। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। बच्चा इसे खेल समझता है। लेकिन खेल खेल में वह ध्यान लगाना, हाथ और आँखों का तालमेल और अपनी कल्पना का इस्तेमाल करना सीखता है। माता पिता के लिए यह सुकून का पल होता है। बच्चा खुश है, व्यस्त है और स्क्रीन से दूर है।
और जब आखिर में वही सवाल आता है कि क्या एक और पेज मिल सकता है, तो जवाब आसान होता है। हाँ, बिल्कुल। क्योंकि Max-D हर बार नई कहानी लेकर आता है। जब तक बच्चे की कल्पना दौड़ती रहेगी, यह मज़ा कभी खत्म नहीं होगा।

सिर्फ पाँच साल की उम्र में, गुस्तावो ने रंग भरने वाले चित्र प्रिंट करने की एक छोटी-सी इच्छा को एक ऐसी सोच में बदल दिया, जो आज 150 देशों से भी ज्यादा बच्चों को प्रेरित करती है।
इसी तरह Imprimivel.com की शुरुआत हुई, एक प्रोजेक्ट जिसे उन्होंने अपने पापा, जीन बेर्नार्डो, के साथ मिलकर बनाया, ताकि 10 भाषाओं में रंग, कल्पना और खुशी फैलाई जा सके, और दुनिया भर में 800 मिलियन बच्चों तक यह जादू पहुँच सके।
आज गुस्तावो उत्साह से उन थीम्स और किरदारों को चुनने में मदद करता है, जो दूसरे बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ला सकें, और उसके पापा उसकी छोटी-छोटी आइडियाज़ को प्यार से हकीकत में बदल देते हैं।
